FEATUREDमध्यप्रदेश

चित्रकूट में मौजूद निराश्रित जीव जंतुओं की सेवा

सतना/चित्रकूट : चित्रकूट में आने वाले सभी भक्त इस बात को बेहतर जानते है की यहाँ बड़ी संख्या में लंगूर ( बन्दर ) है जिनका भरण पोषण यहाँ पहुंचने वाले श्रद्धालु और प्रकृति करते आये है पर इस वैश्विक संकट के बाद इन पर भी संकट है तो ऐसे में यहां इन्हे दुलार मिल रहा है भारत रत्न नाना जी के विचारो से, सेवा से बड़ा कोई परोपकार नहीं है। सेवा चाहे मानव जीवन की हो या निराश्रित जीव जंतुओं की। वैश्विक महामारी कोरोना से संकट की इस घड़ी में हम सभी को चाहिए कि, सेवा के इस महत्व को समझें और दूसरों को भी इस ओर जागरूक करने की पहल करें कोरोना के खिलाफ एक तरफ सरकारी अमला इस महामारी से सीधे जंग लड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ समाजसेवी, व्यापारी वर्ग और सामाजिक संस्थाएं भी कंधे से कंधा मिलाकर नि:सहाय और निराश्रितों के परोपकार में लगी हुई है, जो 21 दिन के लाॅक-डाउन की मार झेल रहे हैं।

Dr Anuj Pratap Singh
JANTA
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चित्रकूट में मौजूद निराश्रित जीव
चित्रकूट में मौजूद निराश्रित जीव

समाज जीवन के सभी पहलु ओं पर जनता की पहल और पुरुषार्थ के उद्देश्य को लेकर समाज के सहयोग से चलने वाला दीनदयाल शोध संस्थान इस आपातकाल की स्थिति में समाज के ही सहयोग से जो भी बन पड़ रहा है, कर रहा है। संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन अपनी टीम के साथ रोजाना परिक्रमा मार्ग और जंगलों में सिमटे बंदर तथा बेजुबान जीव-जंतुओं व गोवंश के साथ जो भी निराश्रित रास्ते में मिल रहे हैं उनको भोजन प्रसाद की व्यवस्था कर रहे हैं।

मैं अपने लिए नहीं, अपनों के लिए हू – नाना जी

भारत रत्न नानाजी देशमुख के बोध वाक्य *”मैं अपने लिए नहीं, अपनों के लिए हूं! अपने वे हैं जो पीड़ित और उपेक्षित हैं”!* को चरितार्थ करते हुए दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव अतुल जैन एवं संगठन सचिव अभय महाजन ने केंद्रीय कार्यालय दिल्ली से पत्र जारी करके अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए अपने देश भर के सभी प्रकल्पों के प्रभारियों एवं वहां के कार्यकर्ताओं से आह्वान किया है कि आपके आसपास किसी बुजुर्ग या गरीब व्यक्ति को आपकी मदद की आवश्यकता है, तो अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए इन विकट परिस्थितियों में हमें अपना समाज धर्म निभाना है।

चित्रकूट
चित्रकूट

लंका पर चढ़ाई के दौरान श्रीराम सेतु के निर्माण में लाखों-करोड़ों गिलहरी भी लग जाती, तब भी सेतु निर्माण में कोई विशेष फर्क पड़ने वाला नहीं था, फिर भी एक छोटी सी गिलहरी का योगदान इतिहास के पन्नों में आज भी अमिट है। इसी तरह भारत रत्न नानाजी देशमुख का प्रकल्प दीनदयाल शोध संस्थान भी इस आपदा काल में अपना सेवा धर्म निभा रहा है। संस्थान के द्वारा समाज के कुछ लोगों के सहयोग से अनाज का संकलन कर कामतानाथ प्राचीन मुखारविंद एवं नगर पंचायत चित्रकूट के सीएमओ के पास भिजवाया जा रहा है ताकि नि:सहाय दीन दुखियों की सेवा हो सके।

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